फ़ेसबुक ने अपनी वेबसाइट पर लोगों के सिर काटे जाने वाले जैसे हिंसक वीडियो को पोस्ट करने और उसे शेयर करने की इज़ाजत दे दी है।
हालांकि ऐसे वीडियो से पहले एक चेतावनी का संदेश जरूर आएगा, लेकिन देखने वाले पर निर्भर होगा कि वह उस वीडियो को देखें या नहीं देखें।
सोशल नेटवर्किंग साइट ने इस वीडियो पर इसी साल मई में अस्थायी पाबंदी लगाई थी क्योंकि कई लोगों ने शिकायत की थी कि ऐसे वीडियो का लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर होगा।
लेकिन अब फ़ेसबुक ने फ़ैसला लिया है कि उसके यूजर्स ऐसे वीडियो को देख सकते हैं और उसकी निंदा कर सकते हैं।
फ़ेसबुक के इस कदम की एक आत्महत्या रोकने के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने विरोध किया है।
कदम का विरोध
उत्तरी आयरलैंड के यलो रिबन प्रोग्राम चला रहे मनोवैज्ञानिक डॉ। आर्थर कैसेडे ने कहा है, "ऐसी सामग्रियों का युवाओं के दिमाग पर लंबे समय तक असर रहता है। ऐसी सामग्री में जितने ज़्यादा ग्राफ़िक्स होंगे या फिर जितना कलरफुल वीडियो होगा, उसका गंभीर मनोवैज्ञानिक असर होता है।"
फ़ेसबुक के दो सुरक्षा सलाहकारों ने भी इस फ़ैसले की आलोचना की है।
तेरह साल से अधिक उम्र का कोई भी शख्स फ़ेसबुक का सदस्य बन सकता है।
इसके नियमों एवं शर्तों में लिखा है कि वेबसाइट ऐसी तस्वीरों और वीडियो को हटा देगा जो हिंसा को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं। अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों को भी हटाया जा सकता है, मसलन महिलाओं की नग्न छाती का प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की तस्वीर।
फ़ेसबुक ने चुपके चुपके अपनी नीतियों में बदलाव किया है।
लेकिन फ़ेसबुक अपनी इन शर्तों में बदलाव ला चुका है। फ़ेसबुक की नीतियों में आए बदलाव के बारे में बीबीसी को एक अनाम पाठक ने सूचित किया है।
चुपके से बदलाव
उस पाठक ने बीबीसी को बताया है कि फ़ेसबुक अपनी वेबसाइट से उस वीडियो को नहीं हटा रहा है, जिसमें मास्क पहना शख़्स एक महिला की हत्या कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो मैक्सिको में फ़िल्माया गया है।
यह वीडियो पिछले सप्ताह फ़ेसबुक पर पोस्ट किया गया, इसका शीर्षक है, चुनौती: कोई भी इस वीडियो को देख सकता है?
इस वीडियो के नीचे एक यूज़र ने कमेंट किया है, "इस वीडियो को हटाया जाए, क्योंकि यह निर्दोष युवाओं के दिमाग पर बुरा असर डाल रहा है।''
एक दूसरे यूज़र का कमेंट है, "यह बेहद भयानक है, ख़राब है और इसे हटाने की ज़रुरत है। कई युवा इसे देख रहे हैं। मैं 23 साल का हूं और इस वीडियो के कुछ सेकेंड देखने के बाद ही काफी व्यथित हूं।''
लेकिन फ़ेसबुक ने बाद में कमेंट करते हुए कहा है कि वह ऐसे वीडियो को पोस्ट करने की अनुमति देने की पुष्टि की है।
फ़ेसबुक ने की पुष्टि
फ़ेसबुक की प्रवक्ता ने कहा है, "फ़ेसबुक वैसा मंच है जिस पर लोग अपने अनुभव बांटते हैं, ख़ासकर तब जब यह अनुभव ज़मीनी स्तर पर विवादास्पद रहे हों। मसलन मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला हो, या फिर आतंकवाद से जुड़ा मसला हो या फिर कोई हिंसक घटना हो।"
प्रवक्ता के मुताबिक ऐसे वीडियो को लोग फ़ेसबुक पर इसलिए शेयर करते हैं ताकि उसकी निंदा करें। अगर ऐसे वीडियो को लेकर जश्न मनाया जाता हो या फिर ऐसे काम को प्रोत्साहित किया जा रहा हो तो हमारा नज़रिया दूसरा होगा।
फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने ये भी कहा, "हालांकि कुछ लोग इस वीडियो के ग्राफिक्स पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन हम लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं ताकि ऐसे वीडियो पर कुछ और नियंत्रण हो सके। इसमें वैसी चेतावनी का पहले आना शामिल है जो वीडियो और ग्राफ़िक कंटेंट के बारे में जानकारी देगा।"
फ़ेसबुक के नए फ़ैसले का काफी यूज़र्स विरोध कर रहे हैं।
इस वीडियो के साथ किसी तीसरी पार्टी के उत्पादों के विज्ञापन वाले वीडियो को भी फ़ेसबुक ने हटा दिया है।
अलोकतांत्रिक कदम
दरअसल सिर काटे जाने वाले वीडियो को फ़ेसबुक ने मई में हटाया था। तब फैमली ऑनलाइन सेफ़्टी इंस्टीच्यूट चैरेटी ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई थी।
इस चैरेटी के नेता स्टीफ़न बलकम ने बीबीसी को बताया है कि वे फ़ेसबुक के नए कदम से आश्चर्य में हैं।
उन्होंने कहा, "मैं काफी दुखी हूं कि यह वीडियो फिर से वापस आ गया है वो भी बिना किसी चेतावनी के। मैं इस मुद्दे को फ़ेसबुक के साथ एक बार फिर उठाऊंगा।"
लंदन स्थित चाइल्डनेट इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विल गार्डेनर ने कहा, "ऐसी सामग्रियों को हटाए जाने की ज़रुरत है। यह बात सही है कि दुनिया भर में जो हो रहा है कि उसे उठाने की ज़रुरत है लेकिन इसमें कुछ आपत्तिजनक भी होते हैं। हमें ऐसी सामग्रियों पर पाबंदी लगानी चाहिए।"
हालांकि ऐसे वीडियो गूगल के यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं। लेकिन आलोचकों का मानना है कि फ़ेसबुक के न्यूज़ फीड सेवा और शेयरिंग की सुविधा के चलते यह तेजी से फैल सकता है।
ब्रिटिश सरकार की चाइल्ड इंटरनेट सेफ्टी काउंसिल के कार्यकारी समिति के सदस्य जॉन कर कहते हैं, "मैंने ऐसे वीडियो देखें हैं और वे काफी विचलित करने वाले वीडियो हैं।"
हालांकि फ़ेसबुक ऐसी सामग्रियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग करने वाले लोग ऐसा भी नहीं चाहते हैं।
फ्रांस की डिज़िटल राइट ग्रुप ला क्वाड्राचेर डू नेट के मुताबिक फ़ेसबुक ने ऐसे वीडियो को हटाने का अधिकार अपने पास रखा है यह उपयुक्त नहीं है।
ग्रुप ला क्वाड्राचेर डू नेट की सह-संस्थापक जेर्मी ज़िम्मरमेन कहती हैं, "यह दर्शाता है कि फ़ेसबुक यह तय करेगा कि कौन से सामग्री उसके नेटवर्क पर पोस्ट हो। यह लोकतांत्रिक कदम नहीं हैं क्योंकि केवल न्यायिक प्रणाली को यह अधिकार है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर नियमों के मुताबिक पाबंदी लगा सके।"
हालांकि ऐसे वीडियो से पहले एक चेतावनी का संदेश जरूर आएगा, लेकिन देखने वाले पर निर्भर होगा कि वह उस वीडियो को देखें या नहीं देखें।
सोशल नेटवर्किंग साइट ने इस वीडियो पर इसी साल मई में अस्थायी पाबंदी लगाई थी क्योंकि कई लोगों ने शिकायत की थी कि ऐसे वीडियो का लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर होगा।
लेकिन अब फ़ेसबुक ने फ़ैसला लिया है कि उसके यूजर्स ऐसे वीडियो को देख सकते हैं और उसकी निंदा कर सकते हैं।
फ़ेसबुक के इस कदम की एक आत्महत्या रोकने के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने विरोध किया है।
कदम का विरोध
उत्तरी आयरलैंड के यलो रिबन प्रोग्राम चला रहे मनोवैज्ञानिक डॉ। आर्थर कैसेडे ने कहा है, "ऐसी सामग्रियों का युवाओं के दिमाग पर लंबे समय तक असर रहता है। ऐसी सामग्री में जितने ज़्यादा ग्राफ़िक्स होंगे या फिर जितना कलरफुल वीडियो होगा, उसका गंभीर मनोवैज्ञानिक असर होता है।"
फ़ेसबुक के दो सुरक्षा सलाहकारों ने भी इस फ़ैसले की आलोचना की है।
तेरह साल से अधिक उम्र का कोई भी शख्स फ़ेसबुक का सदस्य बन सकता है।
इसके नियमों एवं शर्तों में लिखा है कि वेबसाइट ऐसी तस्वीरों और वीडियो को हटा देगा जो हिंसा को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं। अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों को भी हटाया जा सकता है, मसलन महिलाओं की नग्न छाती का प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की तस्वीर।
फ़ेसबुक ने चुपके चुपके अपनी नीतियों में बदलाव किया है।
लेकिन फ़ेसबुक अपनी इन शर्तों में बदलाव ला चुका है। फ़ेसबुक की नीतियों में आए बदलाव के बारे में बीबीसी को एक अनाम पाठक ने सूचित किया है।
चुपके से बदलाव
उस पाठक ने बीबीसी को बताया है कि फ़ेसबुक अपनी वेबसाइट से उस वीडियो को नहीं हटा रहा है, जिसमें मास्क पहना शख़्स एक महिला की हत्या कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो मैक्सिको में फ़िल्माया गया है।
यह वीडियो पिछले सप्ताह फ़ेसबुक पर पोस्ट किया गया, इसका शीर्षक है, चुनौती: कोई भी इस वीडियो को देख सकता है?
इस वीडियो के नीचे एक यूज़र ने कमेंट किया है, "इस वीडियो को हटाया जाए, क्योंकि यह निर्दोष युवाओं के दिमाग पर बुरा असर डाल रहा है।''
एक दूसरे यूज़र का कमेंट है, "यह बेहद भयानक है, ख़राब है और इसे हटाने की ज़रुरत है। कई युवा इसे देख रहे हैं। मैं 23 साल का हूं और इस वीडियो के कुछ सेकेंड देखने के बाद ही काफी व्यथित हूं।''
लेकिन फ़ेसबुक ने बाद में कमेंट करते हुए कहा है कि वह ऐसे वीडियो को पोस्ट करने की अनुमति देने की पुष्टि की है।
फ़ेसबुक ने की पुष्टि
फ़ेसबुक की प्रवक्ता ने कहा है, "फ़ेसबुक वैसा मंच है जिस पर लोग अपने अनुभव बांटते हैं, ख़ासकर तब जब यह अनुभव ज़मीनी स्तर पर विवादास्पद रहे हों। मसलन मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला हो, या फिर आतंकवाद से जुड़ा मसला हो या फिर कोई हिंसक घटना हो।"
प्रवक्ता के मुताबिक ऐसे वीडियो को लोग फ़ेसबुक पर इसलिए शेयर करते हैं ताकि उसकी निंदा करें। अगर ऐसे वीडियो को लेकर जश्न मनाया जाता हो या फिर ऐसे काम को प्रोत्साहित किया जा रहा हो तो हमारा नज़रिया दूसरा होगा।
फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने ये भी कहा, "हालांकि कुछ लोग इस वीडियो के ग्राफिक्स पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन हम लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं ताकि ऐसे वीडियो पर कुछ और नियंत्रण हो सके। इसमें वैसी चेतावनी का पहले आना शामिल है जो वीडियो और ग्राफ़िक कंटेंट के बारे में जानकारी देगा।"
फ़ेसबुक के नए फ़ैसले का काफी यूज़र्स विरोध कर रहे हैं।
इस वीडियो के साथ किसी तीसरी पार्टी के उत्पादों के विज्ञापन वाले वीडियो को भी फ़ेसबुक ने हटा दिया है।
अलोकतांत्रिक कदम
दरअसल सिर काटे जाने वाले वीडियो को फ़ेसबुक ने मई में हटाया था। तब फैमली ऑनलाइन सेफ़्टी इंस्टीच्यूट चैरेटी ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई थी।
इस चैरेटी के नेता स्टीफ़न बलकम ने बीबीसी को बताया है कि वे फ़ेसबुक के नए कदम से आश्चर्य में हैं।
उन्होंने कहा, "मैं काफी दुखी हूं कि यह वीडियो फिर से वापस आ गया है वो भी बिना किसी चेतावनी के। मैं इस मुद्दे को फ़ेसबुक के साथ एक बार फिर उठाऊंगा।"
लंदन स्थित चाइल्डनेट इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विल गार्डेनर ने कहा, "ऐसी सामग्रियों को हटाए जाने की ज़रुरत है। यह बात सही है कि दुनिया भर में जो हो रहा है कि उसे उठाने की ज़रुरत है लेकिन इसमें कुछ आपत्तिजनक भी होते हैं। हमें ऐसी सामग्रियों पर पाबंदी लगानी चाहिए।"
हालांकि ऐसे वीडियो गूगल के यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं। लेकिन आलोचकों का मानना है कि फ़ेसबुक के न्यूज़ फीड सेवा और शेयरिंग की सुविधा के चलते यह तेजी से फैल सकता है।
ब्रिटिश सरकार की चाइल्ड इंटरनेट सेफ्टी काउंसिल के कार्यकारी समिति के सदस्य जॉन कर कहते हैं, "मैंने ऐसे वीडियो देखें हैं और वे काफी विचलित करने वाले वीडियो हैं।"
हालांकि फ़ेसबुक ऐसी सामग्रियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग करने वाले लोग ऐसा भी नहीं चाहते हैं।
फ्रांस की डिज़िटल राइट ग्रुप ला क्वाड्राचेर डू नेट के मुताबिक फ़ेसबुक ने ऐसे वीडियो को हटाने का अधिकार अपने पास रखा है यह उपयुक्त नहीं है।
ग्रुप ला क्वाड्राचेर डू नेट की सह-संस्थापक जेर्मी ज़िम्मरमेन कहती हैं, "यह दर्शाता है कि फ़ेसबुक यह तय करेगा कि कौन से सामग्री उसके नेटवर्क पर पोस्ट हो। यह लोकतांत्रिक कदम नहीं हैं क्योंकि केवल न्यायिक प्रणाली को यह अधिकार है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर नियमों के मुताबिक पाबंदी लगा सके।"
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