Tuesday, 29 October 2013

कुछ यूं बनीं राजेंद्र यादव के उपन्यास पर फिल्म

राजेंद्र यादव के उपन्यास सारा आकाश पर बासु चटर्जी ने इसी नाम से फिल्म बनाई। बड़ी दिलचस्प है उपन्यास के फिल्म बनने की कहानी

बासु चटर्जी को सारा आकाश एक फिल्म की कहानी के रूप में आकृष्ट तो बहुत कर रही थी लेकिन उनका मन यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि कोई पति और पत्नी एक साल तक एक-दूसरे से बात ही न करें।

राजेंद्र यादव ने कहा कि यह कहानी जिन लोगों की है उन्होंने एक साल नहीं लगभग सात साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की।

खैर फिल्म बननी शुरु हुई। बासु चटर्जी चाहते थे कि चूंकि यह कृति राजेंद्र की है इसलिए यदि पटकथा भी वही लिखें तो श्रेष्ठ होगा। राजेंद्र यादव का तर्क था कि सिनेमा और पुस्तक दो अलग-अलग माध्यम हैं।

उनका कहना था कि अब जब सारा आकाश फिल्म के रुप में बननी शुरू हो गई तब उनका इस फिल्म से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए। फिर यह तय हुआ कि फिल्म की स्क्रिप्ट भी बासु चटर्जी ही लिखेंगे।

बासु के मन में उपन्यास के समर और प्रभा के लिए पहले से ही नाम तय थे। सारा आकाश के नायक समर के लिए राकेश पांडेय और प्रभा के लिए मधु चक्रवर्ती का चयन हुआ।

समर के पिता के लिए एके हंगल और मां के लिए दीना पाठक चुने गए। कलाकारों का नाम तय होने के बाद शूटिंग कहां हो इस पर विचार हुआ। बासु चटर्जी इस फिल्म की शूटिंग फिल्म स्टूडियो में नहीं करना चाहते थे।

बासु चाहते थे कि फिल्म एक रियल कहानी की तरह दिखे। फिल्म में वैसा ही घर और माहौल दिखे जैसा उपन्यास को पढ़कर दिमाग में सीन बनता है।

राजेंद्र ने ही बासु की यह समस्या दूर कर दी। राजेंद्र यादव ने कहा कि यदि बासु चटर्जी चाहें तो वह आगरा के उनके पुश्तैनी मकान में शूटिंग कर लें।

बासु राजी हो गए और अकेले ही सुबह वह राजेंद्र के साथ आगारा रवाना हो गए। बासु को वह मकान बहुत पसंद आया। इस तरह सारा आकाश फिल्म की शूटिंग होनी शुरू हुई।

उपन्यास की कहानी में जहां पति पत्नी एक साल तक एक-दूसरे से बात नहीं करतें हैं तो वहीं फिल्म में इस अवधि को घटाकर एक महीना कर दिया गया था। फिल्म बनी और खास तरीके की फिल्म देखने वाले दर्शकों द्वारा सराही भी गई।

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