दीपावली आने वाली है और आप चाह रहे होंगे कि इस साल देवी लक्ष्मी की आप पर
कृपा हो जाए। पूरे साल धन लाभ का मौका मिलता रहे। आपकी यह चाहत पूरी हो
सकती है। इसमें कोई बड़ी बात भी नहीं है लेकिन इसके लिए आपको शास्त्रों
में बताए कुछ बातों पर ध्यान देना होगा।
एक बार देवी रूक्मिणी जो स्वयं लक्ष्मी स्वरूप थी महालक्ष्मी से पूछती हैं कि, हे देवी आप किस मनुष्य पर कृपा करती हैं। रूक्मिणी के प्रश्न को सुनकर देवी लक्ष्मी ने उत्तर दिया कि जो मनुष्य अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है और जरूरत के अनुसार उचित शब्दों को प्रयोग करता है उस पर मैं प्रसन्न रहती हूं। ऐसा मनुष्य मेरी कृपा का पात्र होता है।
जो मनुष्य अपने काम में कुशल होता है उसका साथ मैं कभी नहीं छोड़ती। इसलिए आप जो भी काम करते हैं या जो भी आपको ज्ञान है उसे और बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए।
मां लक्ष्मी कहती हैं जो व्यक्ति लोभ त्यागकर उदारता के साथ दूसरों की सहायता करता है मैं उस पर सदा कृपा करती हूं। मनुष्य को चाहिए कि वह बदले की भावना त्यागकर जरूरतमंद की सहायता करे।
क्रोध बुद्घि का नाश कर देता है। मनुष्य उचित-अनुचित का ज्ञान भूल जाता है परिणाम स्वरूप वह ऐसा काम कर बैठता है जिससे घर आयी लक्ष्मी भी रूठ जाती है। इसलिए जो मनुष्य लक्ष्मी की कृपा चाहता है उसे क्रोध पर काबू रखना आना चाहिए।
जो मनुष्य आलस करता है वह कभी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं कर पाता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह आलस को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे। मोह और काम का त्याग करके जो परिश्रम करता है उससे कभी लक्ष्मी कभी रूठती नहीं हैं।
एक बार देवी रूक्मिणी जो स्वयं लक्ष्मी स्वरूप थी महालक्ष्मी से पूछती हैं कि, हे देवी आप किस मनुष्य पर कृपा करती हैं। रूक्मिणी के प्रश्न को सुनकर देवी लक्ष्मी ने उत्तर दिया कि जो मनुष्य अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है और जरूरत के अनुसार उचित शब्दों को प्रयोग करता है उस पर मैं प्रसन्न रहती हूं। ऐसा मनुष्य मेरी कृपा का पात्र होता है।
जो मनुष्य अपने काम में कुशल होता है उसका साथ मैं कभी नहीं छोड़ती। इसलिए आप जो भी काम करते हैं या जो भी आपको ज्ञान है उसे और बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए।
मां लक्ष्मी कहती हैं जो व्यक्ति लोभ त्यागकर उदारता के साथ दूसरों की सहायता करता है मैं उस पर सदा कृपा करती हूं। मनुष्य को चाहिए कि वह बदले की भावना त्यागकर जरूरतमंद की सहायता करे।
क्रोध बुद्घि का नाश कर देता है। मनुष्य उचित-अनुचित का ज्ञान भूल जाता है परिणाम स्वरूप वह ऐसा काम कर बैठता है जिससे घर आयी लक्ष्मी भी रूठ जाती है। इसलिए जो मनुष्य लक्ष्मी की कृपा चाहता है उसे क्रोध पर काबू रखना आना चाहिए।
जो मनुष्य आलस करता है वह कभी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं कर पाता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह आलस को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे। मोह और काम का त्याग करके जो परिश्रम करता है उससे कभी लक्ष्मी कभी रूठती नहीं हैं।
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