चुनावी रैलियों और राजनीतिक बयानों के बीच मंगलवार को ऐसा अनोखा अवसर आया,
जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और आगामी लोकसभा चुनावों में मुख्य विपक्षी
दल भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी एक ही मंच पर
उपस्थित थे।
अवसर था देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन को समर्पित म्यूजियम के उद्घाटन का।
म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया। अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरदार पटेल का नजरिया सेक्युलर था। उन्हें भारत की अखंडता में विश्वास था और जीवन भर उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया।
मनमोहन सिंह ने कहा सरदार पटेल ने किसानों के लिए संघर्ष किया और उन्हें आजादी के आंदोलन से जोड़ा।
पटेल की राजनीतिक विरासत पर छिड़े विवाद पर पीएम ने कहा, 'मैं जिस राजनीतिक दल का सदस्य हूं, सरदार पटेल का संबंध उसी दल से था। उन्होंने जीवन भर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम किया। वे करांची सत्र में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल को भारत की एकता में अटूट विश्वास था। उन्होंने अपने से अलग विचारधारा का सम्मान किया। देश को आज ऐसे ही नेताओं की जरूरत है।
मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल के आपसी संबधों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पटेल का मानना था कि महात्मा गांधी उन्हें उसी तरह का प्यार देते हैं, जैसे उनके पिता। और गांधी, सरदार पटेल को अपने बेटे की तरह मानते थे।
पीएम ने कहा कि पंडित नेहरु के नेतृत्व में आजादी के बाद जो सरकार बनी, उनमें पटेल उप प्रधानमंत्री थे।
मनमोहन ने कहा, 'पटेल ने एक बार कहा था कि शासन और संगठन के क्षेत्र में नेहरू को सलाह देने का मुझे कई बार अवसर मिला। पंडित नेहरु सलाह लेने को हमेशा उत्सुक दिखे। हमने हमेशा एक दूसरे की सलाह का सम्मान किया। ऐसा वहीं करते हैं, जिन्हें एक दूसरे पर भरोसा होता है।'
प्रधानमंत्री ने अपने संक्षिप्त भाषण के अंत में कहा कि पटेल का सम्मान करने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा की उनके सपने को साकार करने के लिए भरपूर काम करें।
इससे पहले उद्घाटन समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती।
अवसर था देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन को समर्पित म्यूजियम के उद्घाटन का।
म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया। अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरदार पटेल का नजरिया सेक्युलर था। उन्हें भारत की अखंडता में विश्वास था और जीवन भर उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया।
मनमोहन सिंह ने कहा सरदार पटेल ने किसानों के लिए संघर्ष किया और उन्हें आजादी के आंदोलन से जोड़ा।
पटेल की राजनीतिक विरासत पर छिड़े विवाद पर पीएम ने कहा, 'मैं जिस राजनीतिक दल का सदस्य हूं, सरदार पटेल का संबंध उसी दल से था। उन्होंने जीवन भर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम किया। वे करांची सत्र में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल को भारत की एकता में अटूट विश्वास था। उन्होंने अपने से अलग विचारधारा का सम्मान किया। देश को आज ऐसे ही नेताओं की जरूरत है।
मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल के आपसी संबधों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पटेल का मानना था कि महात्मा गांधी उन्हें उसी तरह का प्यार देते हैं, जैसे उनके पिता। और गांधी, सरदार पटेल को अपने बेटे की तरह मानते थे।
पीएम ने कहा कि पंडित नेहरु के नेतृत्व में आजादी के बाद जो सरकार बनी, उनमें पटेल उप प्रधानमंत्री थे।
मनमोहन ने कहा, 'पटेल ने एक बार कहा था कि शासन और संगठन के क्षेत्र में नेहरू को सलाह देने का मुझे कई बार अवसर मिला। पंडित नेहरु सलाह लेने को हमेशा उत्सुक दिखे। हमने हमेशा एक दूसरे की सलाह का सम्मान किया। ऐसा वहीं करते हैं, जिन्हें एक दूसरे पर भरोसा होता है।'
प्रधानमंत्री ने अपने संक्षिप्त भाषण के अंत में कहा कि पटेल का सम्मान करने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा की उनके सपने को साकार करने के लिए भरपूर काम करें।
इससे पहले उद्घाटन समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी ने कहा कि सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती।
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